उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर लिंग एवं शाला के प्रकार का स्वतंत्र एवं अंतःक्रियात्मक प्रभाव का अध्ययन करना

 

डा. तृषा शर्मा

एसोसिएट प्राध्यापक, शिक्षा विभाग, स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, भिलाई

 

प्रस्तुत शोध अध्ययन का उद्देश्य उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर लिंग एवं शाला के प्रकार के प्रभाव का अध्ययन करना है। प्रस्तुत अध्ययन हेतु छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर जिले के सरस्वती शिशु मंदिर तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 11वीं के 400 विद्यार्थियों को स्तरीकृत यादृच्छिक प्रतिदर्श द्वारा चयनित किया गया। बुद्धि के मापन हेतु ओझा एवं राय चैधरी: वाचिक बुद्धि परीक्षण ;त्मअपेमक टमतेपवद 2009द्ध का उपयोग किया गया है। सांख्यिकीय विश्लेषण हेतु लिंग ;2द्ध शाला का प्रकार ;2द्ध द्विदिश प्रसरण विश्लेषण की संगणना की गई है। अध्ययन से प्राप्त निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि, विद्यार्थियों के बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर लिंग का सार्थक प्रभाव नहीं पाया गया। विद्यार्थियों के बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर शाला के प्रकार का स्वतंत्र एवं सार्थक प्रभाव पाया गया। इसी प्रकार लिंग शाला के प्रकार का अंतःक्रियात्मक प्रभाव पाया गया। अतः विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर संयुक्त अंतःक्रियात्मक प्रभाव पड़ता है।

 

सरस्वती शिशु मंदिर, वर्गीकरण प्राप्तांक, बुद्धि, आयाम

 

 

 

प्रस्तावना

इंटेलिजेंसशब्द लैटिन भाषा केइंटेलिजरसे आया है, जिसका अर्थ होता हैसमझ पाना इसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि इंटेलिजेंस का मतलब चतुर या स्मार्ट होना नहीं है। बुद्धि की परिधि में कई क्षमतायें आती हैं और ये अलग-अलग व्यक्तियों के लिए अलग-अलग हो सकती हैं। कुछ लोग जटिल विचारों को समझने में अच्छे हो सकते हैं, कुछ अन्य वातावरण की विभिन्न आवश्यकताओं को अपनाने की योग्यता रखते हैं, वहीं कुछ लोग अनुभवों से सीख लेने में माहिर हो सकते हैं और कुछ दूसरों से बेहतर तर्क प्रस्तुत करने की क्षमता रखते हैं। साथ ही किसी भी व्यक्ति का बौद्धिक प्रदर्शन अलग स्थितियों में और विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग होगा, क्योंकि उसे अलग-अलग विधियों से परखा जायेगा।

 

बुद्धि परीक्षण में यदि कोई छात्र अच्छा रैंक पाता है और विद्यालय की परीक्षाओं में उसे वह रैंक उपलब्ध नहीं हो पाता तो इससे यह स्वयं सिद्ध हो जाता है कि उसकी प्रगति उसके स्तर के अनुसार नहीं है। जिससे उसकी प्रगति से अवरोधी कारकों का अन्य मनोवैज्ञानिक परीक्षणों से पता लगाया जा सकता है। निष्कर्ष रूप मंे हम कह सकते हैं कि ‘‘विद्यालयों में बुद्धि परीक्षणों का उपयोग यह अनुमान लगाने के लिए करते हैं कि बालक विद्यालयी कार्यों में कितनी सफलता अर्जित कर सकता है घ्

 

बुद्धि क्या है घ् यह ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर देना बुद्धिमानों के लिए एक समस्या रही है, वर्तमान में है तथा भविष्य में भी रहने की संभावना है इस शब्द पर मनोवैज्ञानिकों में मतभेद रहा है। लगभग एक शताब्दी से पूर्व जब चाल्र्स डारविन की प्रसिद्ध पुस्तक ‘‘ओरिजिन आॅफ स्पेसीज‘‘ प्रकाशित हुई तो समस्त यूरोपीय देशों में बुद्धि के विकास में विशेष रुचि उत्पन्न हुई, और इस कारण पशुओं की बुद्धि मापन के लिए अनेक परीक्षण विकसित किये गये जिनकी सहायता से चींटी से लेकर चिम्पाॅजी तक की बुद्धि-स्तर का मूल्यांकन किया जाने लगा। इस प्रकार आज भी बुद्धि का सम्प्रत्यय जानवरों की सीखने की विधि से प्रभावित हो रहा है, क्योंकि डारविन के विचारों से प्रभावित होकर मनोवैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष पाया कि बुद्धि नई समस्याओं के समाधान से और नई परिस्थितियों के समायोजन की प्रक्रिया से, शनैः शनैः विकसित होती है। अतः अंतिम विश्लेषण में बुद्धि सीखने की क्षमता का नाम है तथा जो सीखा जा चुका है, उसे नई दशाओं में प्रयोग करने का गुण है। इस प्रकार मनोवैज्ञानिकों का एक वर्ग, जिनमें बकिंघम ;1921द्ध, डारविन तथा एबिंगहास के नाम उल्लेखनीय हैं, यह मानते हैं कि बुद्धि सीखने की क्षमता है।

 

हुण्डाल ;1969द्ध ने कक्षा 7वीं, 9वीं तथा 11वीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों की लिंग विभिन्नता का उनके शाब्दिक एवं क्रियात्मक बुद्धि परीक्षण में अंतर का अध्ययन किया। अध्ययन में पाया कि छात्रों की तुलना में छात्राओं की बुद्धि का स्तर अधिक श्रेष्ठ पाया जाता है। रथ ;1974द्ध ने अध्ययन में पाया कि सामान्य श्रेणी, अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के बच्चों की बुद्धि में कोई अन्तर नहीं होता परन्तु सामान्य श्रेणी के बच्चों की तुलना में अनुसूचित जाति जनजाति के बच्चों का प्रत्यय निर्माण, शाब्दिक, विचारों में साहचर्य, अवबोध में उपलब्धि कम पाई जाती है। गुप्ता ;1988द्ध ने ग्रामीण एवं शहरी पृष्ठभूमि के माध्यमिक विद्यालय के छात्रों के लिंग, बुद्धि तथा सृजनात्मक विकास के मध्य संबंध पर अध्ययन किया। किरतिका एवं अन्य ;2009द्ध ने अपने अध्ययन में पाया की 75 प्रतिशत विद्यार्थियों का झुकाव भाषाविज्ञान, पारस्परिक तथा अस्तित्वपरक बुद्धि के प्रति पाया गया तथा केवल 20 प्रतिशत विद्यार्थियों का बुद्धि के समस्त आयामों में संबंध पाया गया। सिंग एवं कुमार ;2009द्ध ने सरस्वती स्कूल तथा कान्वेंट स्कूल के अध्यापकों के बीच भावनात्मक बुद्धि का अध्ययन किया। सरस्वती स्कूल के अध्यापकों में आत्म-अभिप्रेरणा, मूल्य अभिविन्यास तथा कार्य के प्रति प्रतिबद्धता पाया गया। वहीं कान्वेंट स्कूल के अध्यापक आत्म जागरूकता, प्रबंधन के साथ संबंध, अखंडता एवं परोपकारी आदि भावनात्मक बुद्धि से संबंधित गुण ज्यादा दिखाई दिये। ढाका एवं जस्साल ;2011द्ध ने लुधियाना तथा बीकानेर शहर में रहने वाले किशोरावस्था के विद्यार्थियों की बुद्धि पर प्रभाव का अध्ययन किया इन्होंने छात्रों की बुद्धि लब्धि को छात्राओं से अधिक पाया।

 

अध्ययन के उद्देश्य -

उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर लिंग एवं शाला के प्रकार का स्वतंत्र एवं अंतःक्रियात्मक प्रभाव का अध्ययन करना।

 

परिकल्पना-

भ्0प् उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर लिंग एवं शाला के प्रकार का स्वतंत्र एवं अंतःक्रियात्मक प्रभाव नहीं पाया जायेगा।

 

न्यादर्श -

प्रस्तुत अध्ययन हेतु छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर जिले के सरस्वती शिशु मंदिर तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 11वीं के विद्यार्थियों को स्तरीकृत यादृच्छिक प्रतिदर्श द्वारा चयनित किया गया। सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय के 400 विद्यार्थियों ;200) छात्र एवं 200 छात्राएंद्ध तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के 400 विद्यार्थियों ;200 छात्र एवं 200 छात्राए ंद्ध का चयन किया गया है।

 

उपकरण -

बुद्धि के मापन हेतु ओझा एवं रायचैधरी: वाचिक बुद्धि परीक्षण ;त्मअपेमक टमतेपवद 2009द्ध का उपयोग किया गया है। यह परीक्षण 13 से 20 वर्ष की आयु के बच्चों की मानसिक योग्यता का मापन करता है। इसके 112 पद आठ उप-परीक्षणांे - वर्गीकरण, तुल्यात्मक, पर्याय, संख्यात्मक परीक्षण, पूर्ति परीक्षण, परिच्छेद परीक्षण, उत्तम तर्क तथा सरल तर्क में विभक्त हैं।

 

परिणाम एवं व्याख्या -

प्रस्तुत शोध अध्ययन का उद्देश्य उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर लिंग एवं शाला के प्रकार के प्रभाव का अध्ययन करना है। अतः सांख्यिकीय विश्लेषण हेतु लिंग ;2द्ध शाला के प्रकार ;2द्ध द्विदिश प्रसरण विश्लेषण की संगणना की गई है। द्विदिश प्रसरण विश्लेषण की गणना से प्राप्त सारांश को तालिका में दर्शाया गया है।

 

 

 

तालिका के अवलोकन से ज्ञात होता है कि -

लिंग -

विद्यार्थियों के लिंग का बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर क्या स्वतंत्र प्रभाव पड़ता है? इस अध्ययन हेतु तालिका का निरीक्षण करने से स्पष्ट होता है कि लिंग कारक के लिए प्राप्त थ् का मान 2.10, ि1ध्796 सार्थकता के .01 स्तर पर सार्थक नहीं है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि लिंग के विभिन्न स्तरों में अंतर विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों में विचलनशीलता उत्पन्न नहीं करते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में शून्य परिकल्पना कि, विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर लिंग का स्वतंत्र प्रभाव नहीं पाया जायेगा स्वीकृत की जाती है। लिंग के आधार पर विद्यार्थियों की बुद्धि प्राप्तांकों के मध्यमान को हम निम्न तालिका की सहायता से देख सकते हैं -

 

शाला का प्रकार -

विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर शाला के प्रकार के लिए थ् मूल्य 32.87 है जो कि ि1ध्796 पर सार्थकता के .01 स्तर पर सार्थक है अर्थात् बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांक पर शाला का स्वतंत्र एवं सार्थक प्रभाव पड़ता है अतः शून्य परिकल्पना कि, विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांक पर शाला के प्रकार का स्वतंत्र प्रभाव नहीं पाया जायेगा, अस्वीकृत की जाती है। शाला के प्रकार आधार पर विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों के मध्यमान को निम्न तालिका में दर्शाया गया ळें

 

उपरोक्त तालिका से विदित होता है कि सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय के विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण का प्राप्तांक ;डत्र10ण्64द्ध शासकीय विद्यालय के विद्यार्थियांे की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण के प्राप्तांक ;डत्र9ण्67द्ध की अपेक्षा सार्थक रूप से उच्च पाया गया।

लिंग ग् शाला का प्रकार -

विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर लिंग एवं शाला के प्रकार के बीच की अंतःक्रिया केे लिए थ् का मान 12.07 है जो कि ि1ध्796 पर सार्थकता के .01 स्तर पर सार्थक है अर्थात् लिंग एवं शाला के प्रकार के मध्य अंतःक्रिया का विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण पर संयुक्त अंतःक्रियात्मक प्रभाव पड़ता है। इस परिप्रेक्ष्य में शून्य परिकल्पना कि विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण पर लिंग एवं शाला के प्रकार की अंतःक्रिया का सार्थक प्रभाव नहीं पाया जायेगा, निरस्त की जाती है। लिंग एवं शाला के प्रकार के मध्य की अंतः क्रिया को हम निम्न तालिका ;दद्ध की सहायता से देख सकते हैं -

 

तालिका को देखने से ज्ञात होता है कि सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय के छात्र ;डत्र10ण्82द्ध एवं छात्राओं ;डत्र10ण्47द्ध की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों का मध्यमान शासकीय विद्यालय के विद्यार्थियों के मध्यमान छात्र ;डत्र9ण्25द्ध एवं छात्राओं ;डत्र10ण्09द्ध की अपेक्षा सार्थक रूप से उच्च है। पुनः तालिका से स्पष्ट है कि सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय के छात्रों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण का प्राप्तांक ;डत्र10ण्82द्ध सरस्वती शिशु मंदिर के छात्राओं की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों ;डत्र10ण्47द्ध की अपेक्षा अधिक है। किंतु इसके विपरीत शासकीय शालाओं के छात्राओं की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण का प्राप्तांक ;डत्र10ण्09द्ध शासकीय शालाओं के छात्रों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण के प्राप्तांकों की अपेक्षा ;डत्र9ण्25द्ध उच्च पाया गया। लिंग एवं शाला के प्रकार के मध्य की अंतः क्रिया को हम निम्न आरेख ;इद्ध की सहायता से देख सकते हैं

 

 

 

 

परिणाम

लिंग का प्रभाव

1. विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर लिंग का सार्थक प्रभाव नहीं पाया गया।

 

शाला के प्रकार का प्रभाव

 1.  विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर शाला के प्रकार का सार्थक प्रभाव पाया गया।

 2. सरस्वती शिशु मंदिर के विद्यार्थियों के बुद्धि के आयाम वर्गीकरण का प्राप्तांक शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के बुद्धि के आयाम वर्गीकरण के प्राप्तांकों से उच्च पाया गया।

 

अंतःक्रियात्मक प्रभाव - लिंग शाला के प्रकार का प्रभाव

1ण्  लिंग शाला का प्रकार के मध्य अंतःक्रिया का विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर संयुक्त एवं सार्थक प्रभाव पाया गया।

2ण्  सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र एवं छात्राओं की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों का मध्यमान शासकीय विद्यालय के विद्यार्थियों के मध्यमान की अपेक्षा सार्थक रूप से उच्च पाया गया।

3ण्  सरस्वती शिशु मंदिर के छात्रों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण का प्राप्तांक सरस्वती शिशु मंदिर के छात्राओं की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांको से अधिक पाया गया।

4ण्  शासकीय विद्यालय के छात्राओं की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण का प्राप्तांक शासकीय विद्यालय के छात्रों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण के प्राप्तांकों से उच्च पाया गया।

उपर्युक्त निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि, विद्यार्थियों के बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर लिंग का सार्थक प्रभाव नहीं पाया गया। विद्यार्थियों के बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर शाला के प्रकार का स्वतंत्र एवं सार्थक प्रभाव पाया गया। इसी प्रकार लिंग शाला के प्रकार का अंतःक्रियात्मक प्रभाव पाया गया। अतः विद्यार्थियों की बुद्धि के आयाम वर्गीकरण प्राप्तांकों पर संयुक्त अंतःक्रियात्मक प्रभाव पड़ता है।

 

संदर्भ गं्रथ सूची -

1ण्  क्ींांए डण् ंदक श्रंेेंसए त्ण्ळण् ;2011द्धण् श्ळमदकमत कपििमतमदेमे पद प्दजमससपहमदबम ंउवदह ंकवसमेबमदजेश्ण् च्ेलबीव.सपदहनंए 47 ;1द्धए 30.33ण्

2ण्  ळनचजंए ज्ञण् ज्ञण् ;1988द्धण् ज्ीम बतमंजपअम कमअमसवचउमदज िेमबवदकंतल ेबीववस बीपसकतमद पद तमसंजपवद जव ेमगए पदजमससपहमदबम ंदक नतइंद ंदक तनतंस इंबाहतवनदकण् च्ीण्क्ण्ए म्कनण् ।हतं न्दपअमतेपजलण् थ्पजिी ैनतअमल िम्कनबंजपवदंस त्मंेमतबीए 1048.1049ण्

3ण्  भ्नदकंसए च्ण्ैण्;1969द्धण् ैमग कपििमतमदबमे पद अमतइंस ंदक चमतवितउंदबम जमेजे िपदजमससपहमदबम िकपििमतमदज बसंेे टप्प्ए प्ग् ंदक ग्प्ण् च्ेलबीवसवहपबंय 12 15.20ण्

4ण्  ज्ञपतजपांए ैण्ए ैीममसं ंदक क्नींदए ज्ञण् ;2009द्धण् डनसजपचसम पदजमससपहमदबम िेसवू समंतदमत लवनदह ंकवसमेबमदजेण्क्मचंतजउमदज िभ्नउंद क्मअमसवचउमदज ंदक थ्ंउपसल ैजनकपमेए ब्व्भ्ैए ब्ब्ैभ्।न्ए भ्पेंतए च्ेलबीव.सपदहनंए 2009 39 ;1द्ध रू 74.77ण्

5ण्  त्ंजीए त्ण् ;1974द्धण् ज्मंबीपदह ंदक समंतदपदह चतवइसमउे िजीम कपेंकअंदजंहमक जतपइंस बीपसकतमद चतमेपकमदजपंस ंककतमेेण् 12जी ।ददनंस बवदमितमदबम िजीम प्दकपंद ।बंकमउल ि।चचसपमक च्ेलबीवसवहलय न्जांस न्दपअमतेपजलय ठीनइंदमेीूंतय 28.30ण्

6ण्  ैपदहीए ळण् ंदक ज्ञनउंत ळण् ;2009द्धण् ज्व ंदंसल्रम मउवजपवदंस पदजमससपहमदबम ंउवदह बवदअमदज ंदक ेंतंेूंजप ेबीववस जमंबीमतेण् च्ेलबीव.सपदहनंए 2009 39 ;2द्ध रू 139.141ण्

7ण्  गैरेट, हेनरी . ;1989द्धण् शिक्षा और मनोविज्ञान में सांख्यिकीय के प्रयोग, कल्याणी पब्लिकेशन, 1/1, राजेन्द्र नगर, लुधियाना. ग्यारहवां संस्करण, 1989

8ण्  गुप्ता, मधु ;2000द्धण् शिक्षा-संस्कार एवं उपलब्धि, नई दिल्ली, क्लासिकल पब्लिसिंग कम्पनी,

9ण्  गोदारा, अशोक कुमार एवं सिंह शिरीषपाल ;2008द्धण् शैक्षिक मनोविज्ञान, जयपुर कल्पना पब्लिकेशन

10ण् पाण्डेय, रामशकलण् शिक्षा मनोविज्ञान, निकट गवर्नमेण्ट काॅलेज, मेरठ. आर. लाल. बुक डिपो..

11ण् भटनागर, आर. पी. एवं भटनागर, एम. ;2003द्धण् शिक्षा अनुसंधान, इण्टरनेशनल पब्लिशिंग हाउस, मेरठ, लायल बुक डिपो.

 

 

 

 

 

Received on 19.04.2019            Modified on 14.05.2019

Accepted on 27.05.2019            © A&V Publications All right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2019; 7(2):426-430.